रेवाड़ी

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स्थापना1 नवंबर 1989

पीतल नगरी

              रेवाड़ी

हरियाणा का सबसे ज्यादा पुरुष साक्षरता दर वाला जिला रेवाड़ी है – 91.46 प्रतिशत

 

रेवाड़ी में सर्वप्रथम

  1. रेवाड़ी रेलवे स्टेशन – यह हरियाणा का सबसे बड़ा व सबसे पुराना रेलवे स्टेशन है। जिसकी स्थापना 1873 में हुई थी। यहां पर सबसे पहली ट्रेन रेवाड़ी से दिल्ली तक चली थी।
  2. हरियाणा की ही नहीं, देश की हि नहीं बल्कि विश्व की सबसे पहली गौशाला रेवाड़ी में 1879 में खुली थी। जिसके संस्थापक स्वामी दयानंद थे।
  3. देश की पहली सी.एन.जी. ट्रेन रेवाड़ी से रोहतक के बीच 13 जनवरी 2015 को चली। इसको हरी झंडी तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु के द्वारा दी गई।
  4. संतोष यादव – यह भारत की पहली महिला हैं जो कि 2 बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ी हैं। – 1992 व 1993
  5. NH 48 हरियाणा का ही नहीं बल्कि यह भारत का सबसे व्यस्त राजमार्ग है।
  6. हरियाणा में सबसे कम गाय रेवाड़ी जिले में ही मिलती हैं।

मोनिका सोनी – ईन्हे रेवाड़ी की लता मंगेशकर के नाम से जाना जाता है।

 

  • जनसंख्या – 900332
  • साक्षरता दर – 82.33 प्रतिशत
  • क्षेत्रफल – 1594 वर्ग किलोमीटर
  • जनसंख्या घनत्व – 565 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
  • उप-मंडल – रेवाड़ी, कोसली व बावल।
  • तहसील – रेवाड़ी, बावल, व कोसली।
  • उप-तहसील – धारूहेड़ा, डहिना, मनेठी, नाहड।
  • खंड – रेवाड़ी, खोल, जाटूसाना, नाहड, व बावल।

 

 नामकरण

  • भगवान श्री कृष्ण के समसामयिक और उसके अग्रज बलराम के ससुर रेवत नामक राजा ने अपनी पुत्री रेवती के नाम पर इस नगर का नाम रेवतवाड़ी रखा था, जो बाद में बिगड़कर रेवाड़ी बन गया।
  • एक और अवधारणा के अनुसार इसकी स्थापना 1000 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान के भतीजे कमदपाल के द्वारा की गई।

रेवाड़ी को अन्य कई नामों से जाना जाता है जैसे- 

  • पीतल नगरी
  • बर्तन नगरी
  • वीरों का शहर

(पीतल नगरी रेवाड़ी को बोला जाता है जबकि बर्तन नगरि जगाधरी को बोला जाता है।)

 

इतिहास

  • रेवाड़ी नगर को सर्वप्रथम ऐतिहासिक पटल पर लाने का श्रेय वीर हेमू हो जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री राव वीरेंद्र सिंह, राव तुला राम के वंशज हैं। पीतल नगरी के रूप में रेवाड़ी का जो ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त हुई है, उसका श्रेय यहां के हस्तशिल्प कारों को ही जाता है।
  • बड़ावास का युद्ध – यह युद्ध 12 मार्च 1789 को हुआ था। यह युद्ध शाह आलम द्वितीय व नजफ खां के बीच हुआ था। जिसमें नजफ खां की जीत हुई थी।

 

 

 

रेवाड़ी की कुछ महत्वपूर्ण खास बातें

  1. रेवाड़ी हरियाणा के दक्षिण भाग में स्थित है। यह राजस्थान के अलवर जिले से लगता है।
  2. हरियाणा में आर्य समाज की स्थापना 1880 में हुई थी।

(भारत में पहली आर्य समाज की स्थापना 1875 मुंबई में हुई थी।)

  1. रेवाड़ी जिला दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर स्थित है।
  2. हरियाणा का पहला कैंसर संस्थान रेवाड़ी के मीरपुर में स्थित है, जिसका नाम रामभगवान चैरिटेबल इंस्टिट्यूट ऑफ़ कैंसर एंड रिसर्च सेंटर है।
  3. ज्योतिस समाचार पत्र की शुरुआत 1928 में प्रहलाद शर्मा ने की थी।
  4. रेवाड़ी सैनिक स्कूल की स्थापना 29 अगस्त 2009 को कि गई।
  5. बीकानेर गांव के अल्हड़ बीकानेरी देश के मशहूर कवि थे।
  6. मसानी गांव के पास एनएच 48 पर साहिब नदी पर मसानी बैराज का निर्माण किया गया है।
  7. नंदराम ने औरंगजेब के समय गढ़ी बोलनी गांव में अहीर साम्राज्य की स्थापना की थी।

 

प्रमुख पर्यटक स्थल

  1. राव तुलाराम – रेवाड़ी के स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम का जन्म 9 दिसंबर सन 1825 को रेवाड़ी के राव पूर्ण सिंह के घर में हुआ था। सन 1839 में पिता की मृत्यु के बाद ये पैतृक जागीर के स्वामी बने। 1857 की क्रांति का बिगुल बजते ही बादशाह बहादुरशाह के नेतृत्व में अंग्रेजी राज्य के सब चीज मिटाने के लिए लग गए और रेवाड़ी पर स्वतंत्रता की पताका फहरा दी। 23 सितंबर को इनकी मरण तिथी के दिन हरियाणा शहीदी दिवस बनाया जाता है।
  2. बावल – इस क्षेत्र में अनेक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपनी औद्योगिक इकाइयां स्थापित कि हैं, जिनमें मारूति, कपारो, व्हील्स इंडिया, एक्साईड, असाही इंडिया, वाई.के.के, मुसासी, नैरोलेक, बैकि्टन डिक्शन, मिंडा आदि प्रमुख हैं।
  3. धारूहेड़ा – इसको 18 वीं सदी में नंदराम नामक अहीर ने बसाया था। रेवाड़ी जिले के कुंड क्षेत्र के स्लेट-पत्थर ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हरियाणा बनने के बाद यह कस्बा चर्चा में तब आया जब यहां सहगल पेपर मिल की स्थापना हुई थी, जिसमें बहुत सारा धन सरकारी ऋण से लिया गया था और यह इकाई असफल हो गई थी और सारा सरकारी रुपया डूब गया था।
  4. रेवाड़ी रूरल – इस शहर के आस-पास के क्षेत्र को जंगल की जागीर के नाम से भी जाना जाता था, जिसका प्रबंधक सम्राट हुमायूं ने तिजारा के रूडाराम को बनाया था। उसने घड़ी बोलनी के स्थान पर सैनिक ठिकाना स्थापित कर के एक छोटे से किले का निर्माण करवाया था। इस बोलनी गांव का एक ही सपूत राव नंदराम 18 वीं सदी के प्रारंभ में रेवाड़ी सरकार का हकीम बना था। जिसने नंदरामपुरा और धारुहेड़ा नामक गांव बसाए थे।
  5. इब्राहिम 12 हजारी की मस्जिद – इब्राहिम 12 हजारी मोहम्मद गौरी का एक जनरल था। उसने रेवाड़ी के चौहान सरदार को हराकर यहां मुस्लिम धर्म का अधिपत्य कायम किया था।
  6. लाल मस्जिद – रेवाड़ी की पुरानी कचहरी के समीप एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक मस्जिद स्थित है। इसका निर्माण अकबर के शासनकाल में सन 1570 के आसपास किया गया था।
  7. रानी की ड्योडी – रेवाड़ी जिले में स्थित रानी की ड्योडी भी हरियाणा की प्राचीन और ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। इस ड्योडी का निर्माण सन 1675 में राव नंदराम सिंह ने करवाया था।
  8. रामपुरा महल – यह एक भव्य महल है जो राव तेज सिंह ने 1801 में बनवाया था।
  9. कानोंट दरवाजा – यह भव्य दरवाजा नंद सागर और रानी की ड्योडी का समकालीन है। इसे राव नंदराम ने बनवाया था। पत्थर, इट और चूने से बना यह दरवाजा अहिरवालिए भवन निर्माण कला का एक सर्वश्रेष्ठ नमूना है।
  10. बाघ वाला तालाब – यह तालाब पुरानी तहसील के पास स्थित है। इसका निर्माण राव गुर्जर के पुत्र अहिर ने कराया था लेकिन यह अब पूरी तरह से सूखा हुआ है।
  11. प्रथम सी.एफ.एल. गांव – रेवाड़ी जिले में बिनौला, देश का पहला सी.एफ.एल. गांव है। इस गांव के प्रत्येक घर में सामान्य बल्ब के स्थान पर सी.एफ.एल. बल्ब लगाए गए हैं।
  12. नाहर वन्य जीव अभ्यारण यह रेवाड़ी के कोसली गांव के समीप स्थित है।
  13. सहगल पेपर मिल इसकी स्थापना 11 अगस्त 1975 को धारूहेड़ा में हुई थी।
  14. राव तेज सिंह का तालाब
  15. भगवती आश्रम
  16. हेरिटेज स्टीम लोकोमोटिव म्यूजियम
  17. नैसियानी जैन मंदिर
  18. सैंडपाइपर
  19. मसआनी बैराज

 

प्रमुख मेले और मंदिर 

  1. घंटेश्वर महादेव मंदिर – घंटेश्वर महादेव मंदिर रेवाड़ी का एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में सनातन धर्म के सभी देवी देवताओं की पूजा की जाती है।
  2. भूतेश्वर मंदिर
  3. हनुमान मंदिर
  4. बाबा सूरजगिरी का पौराणिक मेला – खोरी
  5. बाबा पीर का मेला – धारुहेड़ा
  6. भोली माता का मेला – गोली चक्कर
  7. बसंत पंचमी का मेला – काटुंवास
  8. भैरूजी का मेला – भैरुकाबास
  9. बुद्धो माता का मेला – कुतुबपुर
  10. बाबा सच्चा साहिब मेला – गुरावडा

 

प्रमुख व्यक्ति

  1. नरेंद्र यादव ये हरियाणा के युवा माउंटेनर हैं। जो नेहरूगड से संबंधित हैं।
  2. मुफ्ती निजामुद्दीन – मुफ्ती निजामुद्दीन रेवाड़ी में कुतुबपुर के रहने वाले थे। 1857 की क्रांति के दौरान राजा राव तुलाराम की सेना की पलटन नंबर 1 एड्ज्यूटेंट थे। अंग्रेजी सेना से लड़ते हुए नसीबपुर के युद्ध में 16 नवंबर को यह वीरगति को प्राप्त हुए।
  3. हेमू इनका जन्म अलवर जिले में हुआ था। यह नमक के साधन व्यापारी थे। ये 7 अक्टूबर 1556 को दिल्ली के शासक बने और अपने आप को विक्रम घोषित किया। ये दिल्ली के अंतिम हिंदू शासक थे।
  4. कल्लन खां गुडयानी
  5. बालमुकुंद गुप्ता ईन्होंने अपनी पत्रिका मे “शंभू का चिट्ठा” नामक लेख मे मार्ले मिंटो का त्रिव विरोध किया था।
  6. नेकिराम सांगी यह जैतडावास से संबंधित हैं।
  7. सर शादीलाल 1909 में ब्रिटिश सरकार ने इन्हें राय बहादुर की उपाधि दी। 1913 में यह पंजाब उच्च न्यायालय में नियुक्त होने वाले प्रथम भारतीय बने।
  8. राव वीरेंद्र ये हरियाणा के प्रथम गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। ईन्होंने विशाल हरियाणा पार्टी का गठन किया। ये हरियाणा के प्रथम पुरुष विधानसभा अध्यक्ष बने।

 

प्रमुख नदी – साहिब (यह रेवाड़ी के पूर्वी भाग में बहती है)

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